Monday 28 July 2008

आज देख सरिता

देख सरिता
तेरी बेटियां आज अनाथ हो गईं
उनका बाप भी मर गया
वो बड़ी होंगी तो उनकी संवेदनाएं कैसे जिंदा रहेंगी
तूने गलत किया था
तेरी बेटियां अनाथ हो गईं
आज देख सरिता


उसे दूसरी बीवी मिल जाएगी
दूसरे बच्चे मिल जाएंगे
तेरे दोषी भी एक दिन छूट जाएंगे
तूने खुद की जान नहीं दी
अपनी बेटियों की जान ली है सरिता
तेरी बेटियां अनाथ हो गईं
आज देख सरिता


तेरे प्रेम का किनारा तेरी मौत था
शायद कइयों को सीख मिली होगी
न्याय के दीए का तेल खत्म हो चुका है
न्याय की उम्मीद तेरे साथ ही रुख्सत हुई
तूने मासूमों को सजा दी है सरिता
तेरी बेटियां अनाथ हो गईं
आज देख सरिता

Sunday 27 July 2008

सफलता

सफलता का मानव को आगे बढ़ाने में बहुत बड़ा योगदान है। चाहे वो मानव अच्छा हो या बुरा। जैसा की एक साधु को यज्ञ के सफल हो जाने पर जितनी खुशी होगी उतनी ही खुशी एक चोर को अपने पहली चोरी सफल हो जाने पर होगी। इसलिए हम कह सकते है की "सफलता आदमी के अच्छे या बुरे कर्म नही देखती बल्कि केवल हौंसला बढाने का कार्य करती है।"

Saturday 26 July 2008

भाग्य

भाग्य यह एक ऐसा शब्द है जिसे लेकर हमेशा से दो तरह की बाते होती रहती है।
पहला यह की कुछ लोग कहते है की जब तक भाग्य का साथ न हो मानव के साथ कुछ अच्छा नही होता।
दूसरा यह की भाग्य तो मानव के अपने हाथ में है जब चाहे बदल सकता है।
इस तरह की दोमुही बातों से तो यही लगता है की भाग्य के बारे में कोई कुछ नही जानता , तो इसके पीछे भी शायद मेरे विचार में कारण यही है की भाग्य भी एक प्रकिर्त का अभिन्न अंग है। और सही मायने में हम आज भी प्रकिर्त के इस अंग के बारे में कुछ नही जानते और जो इस मुद्दे पर बहस करते है उन्हें भी यह मान लेना चाहिए की सच तो यह है की हम मानव प्रकिर्त के एक भी अंग के बारे में कुछ नही जानते। अतः भाग्य को हम प्रकिर्त का एक अभिन्न अंग कहे तो कोई अतिशोयोक्ति नही होगी।

Thursday 17 July 2008

पत्रकार किसलिए होते हैं?

पत्रकार किसलिए होते हैं? पत्रकारों से लोग दोस्ती क्यों करते हैं? यह दो सवाल शायद आपने कभी न सोचा हो पर यह एक बड़ा ही रोचक विषय है। मैं कई दिनों से इस विषय पर सोच रहा हूं। मेरा एक दोस्त बना। उसका नाम था नाम नहीं बताउंगा। अगर उसने यह ब्लाग पढ़ लिया तो नाराज न हो जाए। मेरे नए दोस्त ने मुझे अपना विजिटिंग कार्ड दिया। मैंने भी अपना विजिटिंग कार्ड उसे दिया। उसने कहा थैंक्स। और बोला- कभी किसी पुलिसवाले ने आते जाते रोका तो आपको फोन करुंगा।
इसके बाद मेरे पास जवाब नहीं बचा और कुछ भी कहने को नहीं बचा। हालांकि कोई और होता तो शायद सीना फुलाकर कहता- क्यों नहीं, हम आखिर काम किस दिन आएंगे। वास्तविकता तो यह है कि पत्रकार ऎसी बातें सुनकर खुश भी होते हैं और एक वास्तविकता यह भी है कि जब काम पड़ता है तो कोई काम नहीं आता।
पत्रकारों ने खुद ही अपनी ऎसी छवि बना ली है। हम आम लोग नहीं रहे हैं। हर कोई टेंशन देने की सोचता है। क्या हम लोग केवल पुलिस से पंगा लेने के लिए ही हैं? क्या बड़े लोगों को फोन पर डराने के लिए हैं? क्या पत्रकार एक चालान बचाने के लिए हैं?
इन प्रश्नों पर गहराई से सोचा। मेरे दोस्त वाली घटना के अगले ही दिन मेरे किराए के घर पर गैस एजेंसी वाला आया। बोला आपने कनेक्शन के लिए एप्लाई किया था मैं जांच के लिए आया हूं। वह रसोई देखकर बोला आपके पास तो पहले ही गैस है। कनेक्शन नहीं मिलेगा। इससे पहले भी यही एजेंसी वाले हमें काफी परेशान कर चुके थे। हमने बताया नहीं था कि हम पत्रकार हैं। जांच करने आए आदमी से उसके बास का नंबर लिया और बात की। उसे कहा कि हम फलां फलां अखबार से बोल रहे हैं। आपका आदमी यह बात कह रहा है। तो आप बताएं कि क्या हो सकता है। यदि हो सकता है तो ठीक नहीं तो हम कुछ और करें।
एजेंसी के मालिक ने अपने आदमी को उसी वक्त फोन करके धमकाया और कहा कि इनका फार्म भर लाऒ। दोंनों घटनाएं मुझे परेशान कर रही हैं। अपने सवाल का जवाब तो मिल गया लेकिन.......

Tuesday 15 July 2008

By Dr. Samuals

नारी के बिना
पुरुष की बाल्या अवस्था असहाय
युवा अवस्था सुखरहित
व बॄद्धा अवस्था वफादार साथी से रहित है॥

Sunday 13 July 2008

LIFE

LIFE IS A BATTLE GROUND

Saturday 12 July 2008

AALSI

दुनिया मैं हाथ पैर हिलाना नही अच्छा, मर जाना पर उठ के जाना नही अच्छा
सिर भारी चीज है इसको कस्ट हो तो हो, पर जीभ बेचारी को सताना नही अच्छा
बिस्तर पर मिस्न लोथ परे रहना हमेसा, बन्दर की तरह धूम मचाना नही अच्छा

MITENDRA SINGH

WHELTH IS GONE NOTHING GONE
HELTH IS GONE SOMETING GONE
BUT
CARACTER IS GONE ALLTHING GONE